आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान

प्रस्तावना 

आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, संपादक, प्रखर चिंतक एवं विचारक डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी  का पांडित्य, भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन और उनका लेखन अपने आप में अद्भुत है । आचार्य जी के रचनाकर्म पर तमाम विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शोध कार्य चल रहे हैं। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट की कोशिश है कि नई पीढ़ी हिन्दी साहित्य के प्रति आकर्षित हो और आचार्य जी के रचना कर्म का लाभ उठाए । इसी उद्देश्य  को लेकर  ट्रस्ट ने आचार्य जी के लेखन पर  शोध करने वालों को प्रोत्साहित और सम्मानित करने  के लिए एक व्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है।

सम्मान के लिए योग्यता:-  

यह सम्मान उन शोधार्थियों के लिए है जिन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के कृतित्व या व्यक्तित्व पर शोध कार्य किया है और  पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।

इस सम्मान के लिए विगत 5 वर्षों के दौरान  पीएचडी, डी.लिट.करने वाले ही आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन की प्रक्रिया:- 
आवेदन के लिए उम्मीदवारों को अपना फोटो, परिचय, विश्वविद्यालय द्वारा अवार्ड की गई पीएचडी उपाधि का प्रमाण पत्र, अपने शोध ग्रन्थ (थीसिस) की एक पीडीएफ कॉपी 30 नवम्बर तक देनी होगी। 
 

 सम्मान चयन प्रक्रिया: 
सम्मान के लिए हर वर्ष 30 नवम्बर तक प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों का अध्ययन, मूल्यांकन एवं चयन विद्वतजनों की छह सदस्यीय जूरी करेगी जो हिन्दी साहित्य के साथ-साथ आचार्य जी के रचना संसार के मर्मज्ञ हैं।  

सम्मान की घोषणा:-

हर साल 15 जनवरी तक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान की घोषणा कर दी जाएगी।

सम्मान स्वरूप देय:- 

  • आदरणीय श्री सुरेन्द्र शर्मा जी द्वारा विजेता को नकद राशि
  • प्रशस्ति-पत्र एवं प्रतीक चिह्‌न
  • चयनित शोध ग्रंथ के आधार पर राजकमल प्रकाशन समूह  द्वारा  पुस्तक प्रकाशन
  • आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की ग्रंथावली की एक प्रति।

सनद रहे:- 

  • लेखक और प्रकाशक के बीच होने वाले अनुबंध में ट्रस्ट की कोई भूमिका नहीं होगी।
  • चयनित उम्मीदवार की पुस्तक का कॉपीराइट लेखक का होगा।
  • ट्रस्ट प्रकाशित किताब पर किसी भी तरह की रॉयल्टी का दावा नहीं करेगा

जूरी सदस्य

डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी

 आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के परम प्रिय शिष्य डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी हिन्दी साहित्य के  वरिष्ठ आलोचक, कवि और गद्यकार हैं।  उनकी पुस्तक ‘व्योमकेश दरवेश’ उनके गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के जीवन और दर्शन पर आधारित है। डॉ. त्रिपाठी की रचनात्मकता और उनके योगदान को देखते हुए, उन्हें अनेक सम्मान और पुरस्कारों से नवाजा गया है।  उन्हें ‘व्योमकेश दरवेश’ के लिए वर्ष 2014 में ‘मूर्ति देवी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। डॉ.त्रिपाठी की साहित्यिक यात्रा और उनके योगदान ने हिन्दी साहित्य को एक नई दिशा और गहराई प्रदान की है। उनकी रचनाएँ और विचार छात्रों और साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

प्रो. अनिल राय
प्रो.  राय वर्तमान में हिन्दी विभाग , दिल्ली विश्वविद्यालय दक्षिण परिसर के अध्यक्ष हैं ।इसके साथ ही वे दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय में डीन, अंतरराष्ट्रीय संबंध (मानविकी एवं समाज विज्ञान) हैं। वे कमला नेहरू कॉलेज और शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ़ बिज़नेस स्टडी के चेयरमैन रहे ,दौलत राम कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य तथा देशबंधु कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की गवर्निंग बॉडी में कोषाध्यक्ष भी रहे हैं। इनकी महत्वपूर्ण पुस्तकों में ‘निर्गुण काव्य में नारी, ‘स्त्री के हक में कबीर, ‘आदिकालीन हिन्दी साहित्यः अध्ययन की दिशाएं, ‘निबंधों की दुनिया: शिवपूजन सहाय, ‘चीनी लोक कथाएं, ‘माओ के देश में तथा ‘पश्चात्य काव्यशास्त्र : कुछ सिद्धांत कुछ वाद’, ‘भक्ति संवेदना और मानव मूल्य’ शामिल हैं। प्रो राय  उत्तर प्रदेश सरकार के संत कबीर सम्मान से सम्मानित हैं।

श्री अशोक माहेश्वरी
अशोक महेश्वरी ने रूहेलखंड विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी साहित्य) की पढ़ाई पूरी की। वे 1974 में प्रकाशन की दुनिया में सक्रिय हुए। 1978 में ‘वाणी प्रकाशन’ का कार्यभार सँभाला। इसे सफलता की राह में तेज़ी से आगे बढ़ाते हुए 1988 में हिन्दी के प्रमुख प्रकाशनों में एक ‘राधाकृष्ण प्रकाशन’ का कार्यभार भी सँभाला। 1991 में ‘वाणी प्रकाशन’ की ज़‍िम्मेदारी से अलग हो गए। 1994 में हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान ‘राजकमल प्रकाशन’ के प्रबन्ध निदेशक बने। ‘राजकमल’ और ‘राधाकृष्ण प्रकाशन’ को प्रगति-पथ पर आगे बढ़ाते हुए 2005 में ‘लोकभारती प्रकाशन’ का भी कार्यभार सँभाला। फ़‍िलहाल वे हिन्दी के तीन प्रमुख साहित्यिक प्रकाशनों के समूह ‘राजकमल प्रकाशन समूह’ के अध्यक्ष हैं।

प्रो. नीरज कुमार 

प्रो. नीरज कुमार मानविकी और भाषाएँ विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली में प्रोफेसर के रुप में कार्यरत हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. (ऑनर्स) हिन्दी, एम.ए., एम.फिल, और पी.एच.डी. की डिग्रियाँ प्राप्त कीं। उनकी विशेषज्ञता और शोध रुचियों में निराला, तुलसीदास, आधुनिक कविता और कथा साहित्य शामिल हैं।  प्रो. कुमार का शिक्षण अनुभव 20 वर्षों से अधिक का है, जिसमें वे स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ाते रहे हैं और 2003 से शोध निर्देशन भी कर रहे हैं।  उनकी प्रमुख पुस्तक “निराला की जातीय चेतना” 2007 में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और संकलनों में लेख और समीक्षा भी प्रकाशित किए हैं।

प्रो.वेद प्रकाश
प्रो. वेद प्रकाश का जन्म 5 जून 1970 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की, जहाँ से उन्होंने हिंदी में एमए और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से रिसर्च फैलोशिप भी प्राप्त कर चुके हैं। उनके उल्लेखनीय कार्यों में ‘नेहरू युग और अकविता’, ‘हरिशंकर परसाई : व्यंग्य की व्याप्ति और गहराई’ शामिल हैं। उन्होंने ‘नागार्जुन : प्रतिनिधि कविताएँ’, ‘भाषा, साहित्य और जातीयता'(डॉ. रामविलास शर्मा के लेख) और ‘भोलाराम का जीव'(हरिशंकर परसाई के लेख) किताबों का संपादन  किया है। वेद प्रकाश ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कला संकाय और हिंदी विभाग द्वारा प्रकाशित की जानेवाली शोध- पत्रिकाओं के उत्तर औपनिवेशिक साहित्य-विमर्श, अमृतलाल नागर और शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी पर केंद्रित अंकों का भी संपादन किया है। वर्तमान में वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ.अपर्णा द्विवेदी
डॉ. अपर्णा द्विवेदी पत्रकार और लेखकर हैं। उन्हें मीडिया, अकादमिक, परामर्श और डिजिटल एरिना के क्षेत्र में मीडिया हाउस और सरकारी क्षेत्र के साथ काम करने का करीब 30 वर्षों का अनुभव है। फैक्ट चेकिंग के लिए गूगल ट्रेनर और भारतीय राजनीति की विशेषज्ञ। वह बीबीसी जैसी विभिन्न समाचार वेबसाइटों और पत्रिकाओं के लिए लिखती रही हैं ।वह समाचार चैनल न्यूज़ एक्स और प्राइम न्यूज़ में संपादक के रूप में कार्यरत थीं ।वह आज तक, स्टार न्यूज़ ( अब एबीपी न्यूज़) और एनडीटीवी मेट्रो नेशन जैसे प्रमुख समाचार चैनलों की संस्थापक टीम की सदस्य रही हैं ।उन्होंने कई पुस्तकें और शोध पत्र भी लिखे हैं जो कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।
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