आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, संपादक, प्रखर चिंतक एवं विचारक डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी का पांडित्य, भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन और उनका लेखन अपने आप में अद्भुत है । आचार्य जी के रचनाकर्म पर तमाम विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शोध कार्य चल रहे हैं। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट की कोशिश है कि नई पीढ़ी हिन्दी साहित्य के प्रति आकर्षित हो और आचार्य जी के रचना कर्म का लाभ उठाए । इसी उद्देश्य को लेकर ट्रस्ट ने आचार्य जी के लेखन पर शोध करने वालों को प्रोत्साहित और सम्मानित करने के लिए एक व्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है।

सम्मान के लिए योग्यता:-
यह सम्मान उन शोधार्थियों के लिए है जिन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के कृतित्व या व्यक्तित्व पर शोध कार्य किया है और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
इस सम्मान के लिए विगत 5 वर्षों के दौरान पीएचडी, डी.लिट.करने वाले ही आवेदन कर सकते हैं।


हर साल 15 जनवरी तक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान की घोषणा कर दी जाएगी।
सम्मान स्वरूप देय:-
सनद रहे:-

डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी



प्रो. नीरज कुमार
प्रो. नीरज कुमार मानविकी और भाषाएँ विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली में प्रोफेसर के रुप में कार्यरत हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. (ऑनर्स) हिन्दी, एम.ए., एम.फिल, और पी.एच.डी. की डिग्रियाँ प्राप्त कीं। उनकी विशेषज्ञता और शोध रुचियों में निराला, तुलसीदास, आधुनिक कविता और कथा साहित्य शामिल हैं। प्रो. कुमार का शिक्षण अनुभव 20 वर्षों से अधिक का है, जिसमें वे स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को पढ़ाते रहे हैं और 2003 से शोध निर्देशन भी कर रहे हैं। उनकी प्रमुख पुस्तक “निराला की जातीय चेतना” 2007 में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और संकलनों में लेख और समीक्षा भी प्रकाशित किए हैं।

