






लोक मानस के लिए रचा गया आचार्य द्विवेदी का साहित्य : अरविंदाक्षन
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट और क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी ने संयुक्त रूप से आयोजित की राष्ट्रीय संगोष्ठी
बेंगलुरु। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व सम कुलपति, हिंदी और मलयालम साहित्य के विद्वान एवं लेखक डॉ. ए. अरविंदाक्षन ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने साहित्य को केवल राजनीति या अर्थशास्त्र के चश्मे से नहीं देखा, बल्कि उसे भारतीय समाज की दीर्घकालीन सांस्कृतिक निरंतरता और लोक चेतना से जोड़कर परखा। आचार्य द्विवेदी का साहित्य लोक मानस के लिए रचा गया। उनके पूरे लेखन में मनुष्य ही साहित्य का लक्ष्य है। डॉ. ए. अरविंदाक्षन शुक्रवार को बेंगलुरु स्थित क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी परिसर में ‘हिंदी साहित्य और आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट, नई दिल्ली और क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
संपन्न कार्यक्रम
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट
द्वितीय शोध सम्मान – औपचारिक घोषणा
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट यह घोषणा करता है कि द्वितीय आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान हेतु आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
योग्यता:
– यह सम्मान उन शोधार्थियों के लिए है जिन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के कृतित्व या व्यक्तित्व पर शोध कार्य किया है और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
– केवल वे उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने विगत पाँच वर्षों में पीएचडी अथवा डी.लिट. की उपाधि प्राप्त की है।
आवेदन प्रक्रिया:
– उम्मीदवार को अपना फोटो, संक्षिप्त परिचय, विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त पीएचडी उपाधि का प्रमाण पत्र तथा अपने शोध ग्रन्थ (थीसिस) की पीडीएफ प्रति प्रस्तुत करनी होगी।
– आवेदन की अंतिम तिथि: 30 नवम्बर 2026।
चयन प्रक्रिया:
– प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन छह सदस्यीय जूरी द्वारा किया जाएगा।
– विजेता की घोषणा 15 जनवरी 2027 को की जाएगी।
– उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट – एक परिचय
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय संस्कृति के प्रखर व्याख्याता और हिन्दी साहित्य के महान चिंतक थे। भारतीय परंपरा और संस्कृति पर उनकी वैज्ञानिक दृष्टि आज भी साहित्यिक और बौद्धिक जगत की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। यही विवेकपूर्ण और वैज्ञानिक सोच आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट के मूल दर्शन का आधार है।
इस ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2021 में हुई, जिसका उद्देश्य आचार्य जी के लेखन, विचार और दृष्टिकोण को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवाओं तक पहुंचाना है। साथ ही, ट्रस्ट का प्रयास है कि डिजिटल युग में हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता को बढ़ाया जाए। ट्रस्ट शिक्षा, पर्यावरण, साहित्यिक शोध और सांस्कृतिक संवाद—इन चार प्रमुख क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इन सभी प्रयासों के माध्यम से ट्रस्ट हिन्दी भाषा के समृद्ध भविष्य और आचार्य जी की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन हेतु ट्रस्ट की पहल
हिन्दी भाषा और शोध को समर्पित हमारा विस्तार
पंख – शिक्षा के माध्यम से उड़ान
साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन हेतु ट्रस्ट की पहल
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
हिन्दी के श्रेष्ट निबन्धकार आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई0 में बलिया जनपद के दूबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम अनमोल द्विवेदी था ।
इनके पिता एक ज्योतिषि और संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे; अत: इन्हें ज्योतिष और संस्कृत की शिक्षा उत्तराधिकार में प्राप्त हुई। काशी जाकर इन्होंने संस्कृत – साहित्य और ज्योतिष का उच्चस्तरीय ज्ञान प्राप्त किया। इनकी प्रतिमा का विशेष विकास विश्वविख्यात संस्था शान्ति निकेतन में हुआ । वहाँ ये 11 वर्ष तक हिन्दी भवन के निदेशक के रुप में कार्य करते रहें। वहीं इनके विस्तृत अध्ययन और लेखक का कार्य प्रारम्भ हुआ।
सन् 1949 ई0 में लखनऊ विश्वविद्याल ने इन्हें डी0लिट की उपाधि से तथा सन् 1957 ई0 में भारत सरकार ने ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से विभूषित किया।
इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्याल और पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर कार्य किया तथा उत्तर प्रदेश सरकार की हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के अध्यक्ष रहे। तत्पश्चात् ये हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के सभापति भी रहे। 19 मई, 1979 ई0 को इनका महाप्रयाण हो गया।
