📍 स्थान: साहित्य अकादेमी सभागार, प्रथम तल
🕟 अपराह्न 4:30 बजे – चायपान
🕔 कार्यक्रम आरंभ: सायं 5:00 बजे
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🕔 कार्यक्रम आरंभ: सायं 5:00 बजे

हिंदी साहित्य में डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी एक ऐसे आलोचक, कवि और गद्यकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने मध्यकालीन से लेकर समकालीन साहित्य तक गहरी अंतर्दृष्टि प्रस्तुत की। वे आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के परम शिष्य रहे और उनके मार्गदर्शन ने त्रिपाठी जी को आलोचना और संस्कृति के बीच सेतु बनाने की दृष्टि दी। द्विवेदी जी ने हिंदी साहित्य को आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन का आधार दिया, और त्रिपाठी जी ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आलोचना को समाज और संस्कृति की जिम्मेदारी से जोड़ा। त्रिपाठी जी की रचनाएँ आलोचना, संस्मरण और कविता तीनों क्षेत्रों में फैली हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में हिन्दी आलोचना, लोकवादी तुलसीदास, मीरा का काव्य, नंगातलाई का गाँव और व्योमकेश दरवेश शामिल हैं। उन्होंने आचार्य द्विवेदी के साथ अपभ्रंश काव्य संदेश रासक का संपादन भी किया। उनकी आलोचना शैली प्रगतिशील विचारधारा से जुड़ी रही, परंतु वे कट्टरता से दूर रहे। उन्हें मूर्तिदेवी सम्मान, व्यास सम्मान, सोवियत लैंड नेहरू सम्मान और शलाका सम्मान जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। उनका जीवन और लेखन यह प्रमाण है कि आलोचना केवल साहित्यिक विवेचना नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के प्रति गहरी जिम्मेदारी का निर्वाह भी है। हिंदी साहित्य में उनकी उपस्थिति एक स्थायी धरोहर है।

दिल्ली के गृह, विद्युत एवं शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद जी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं । वे जनकपुरी विधानसभा क्षेत्र से 8वीं दिल्ली विधानसभा में विधायक निर्वाचित हुए। इसके अतिरिक्त वे भाजपा संगठन में प्रभारी गोवा तथा सह प्रभारी जम्मू एवं कश्मीर की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। शिक्षा मंत्री के रूप में आशीष सूद ने विद्यालयों में डिजिटल उपकरणों की योजना, बुनियादी ढाँचे का विकास और कॉर्पोरेट कंपनियों को सीएसआर फंड के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रेरित किया। आशीष जी की राजनीतिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से आरंभ हुई, जहाँ उन्होंने वाणिज्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों का नेतृत्व किया और युवाओं में राजनीतिक चेतना जगाई। 2002 से उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाईं और भाजपा दिल्ली संगठन में सचिव, महासचिव तथा उपाध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया। वे दक्षिण दिल्ली नगर निगम के पार्षद और सदन नेता भी रहे, जहाँ उन्होंने शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और जनकल्याण से जुड़ी कई योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया। आशीष सूद आज भाजपा के एक सशक्त, दूरदर्शी और जनसेवा को समर्पित नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।

भारतीय साहित्य जगत में सुरेंद्र शर्मा जी का नाम हास्य और व्यंग्य के साथ-साथ गहरी संवेदना के लिए भी जाना जाता है। 1945 में जन्मे शर्मा जी ने अपनी विशिष्ट शैली से पाठकों और श्रोताओं को हमेशा बाँधे रखा। हरियाणवी बोली में उनका मशहूर मुहावरा “चार लैना सुना रहा हूँ” आज भी मंचों पर गूंजता है। वे अक्सर अपनी पत्नी और स्वयं को केंद्र में रखकर हास्य रचनाएँ प्रस्तुत करते हैं, जिनमें घरेलू जीवन की सहजता और चुटीली टिप्पणियाँ झलकती हैं। साहित्य में उनके योगदान को भारत सरकार ने 2013 में पद्म श्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया। शर्मा जी दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष पद को भी सुशोभित कर चुके हैं। सुरेंद्र जी का व्यक्तित्व केवल हास्य तक सीमित नहीं है। कोरोना महामारी के कठिन समय में वे रात-दिन गाड़ी लेकर निकलते रहे—किसी को ऑक्सीजन दिलाने, किसी को अस्पताल में बिस्तर उपलब्ध कराने के लिए अपने संपर्कों का उपयोग करते रहे। इस दौरान वे स्वयं भी संक्रमण की चपेट में आए, लेकिन दूसरों की मदद करने से पीछे नहीं हटे। सुरेंद्र शर्मा जी आज भी मंचों पर सक्रिय हैं और उनकी रचनाएँ यह प्रमाण हैं कि हास्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का सशक्त माध्यम भी है।

दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (अपराध एवं परसेप्शन मैनेजमेंट एवं मीडिया सेल) श्री देवेश चंद्र श्रीवास्तव भारतीय पुलिस सेवा के उन अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने तीन दशकों से अधिक लंबे करियर में पुलिसिंग को मानवीय दृष्टिकोण और तकनीकी नवाचारों से नई दिशा दी है। देवेश जी ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और मिज़ोरम राज्य में महानिदेशक पुलिस के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया। दिल्ली पुलिस में वापसी के बाद वे अपराध नियंत्रण, मीडिया प्रबंधन और जनधारणा सुधार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। साथ ही, वे पुलिस फाउंडेशन फॉर एजुकेशन (PFED) के अध्यक्ष हैं।दिल्ली पुलिस द्वारा संचालित तीन पब्लिक स्कूल और तेरह अध्ययन केंद्र आते हैं। आईआईटी दिल्ली से एम.टेक (मैनेजमेंट एवं सिस्टम्स) और उस्मानिया विश्वविद्यालय से पुलिस प्रबंधन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने वाले श्री श्रीवास्तव को राष्ट्रपति पुलिस पदक (मेधावी सेवा एवं विशिष्ट सेवा), उत्कृष सेवा पदक, आंतरिक सुरक्षा पदक, अरुणाचल प्रदेश राज्य पुरस्कार और पुलिस आयुक्त प्रशस्ति डिस्क जैसे अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने दिल्ली, गोवा और उत्तर-पूर्वी भारत में जिला पुलिसिंग की, अरुणाचल प्रदेश में अग्निशमन सेवा और पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन का नेतृत्व किया, इंटेलिजेंस ब्यूरो में उप निदेशक रहे और ओएनजीसी में कार्यकारी निदेशक (सुरक्षा) के रूप में भी कार्य किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध के डीन प्रो.अनिल राय हिंदी आलोचना और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एम.ए., एमफिल. और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। उनके शोध का क्षेत्र भक्ति साहित्य रहा है , जिस पर उन्होंने गहन अध्ययन किया है। प्रो. राय की कई पुस्तकें प्रकाशित और चर्चित रही हैं, जिनमें निर्गुण काव्य में नारी, आदिकालीन हिंदी साहित्य अध्ययन की दिशाएँ, स्त्री के हक में कबीर और माओ के देश में प्रमुख हैं। उनके लेख और शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होते रहे हैं। हिंदी साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2022 में प्रयागराज स्थित हिंदुस्तानी अकादमी द्वारा संत कबीर सम्मान से सम्मानित किया गया। अनिल राय जी का लेखन अपने सर्जनात्मक और गहरी अंतर्दृष्टि परक अध्यापन और शोध के साथ-साथ वे हिंदी साहित्य को नई दृष्टि देने वाले आलोचक के रूप में पहचाने जाते हैं।

श्री अशोक माहेश्वरी जी हिंदी प्रकाशन जगत की एक प्रतिष्ठित हस्ती हैं, जो राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक के रूप में लंबे समय से साहित्यिक संस्कृति पर महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। राजकमल प्रकाशन, जिसे हिंदी साहित्य का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान माना जाता है, उनके नेतृत्व में आधुनिकता और परंपरा का संतुलन साधते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। माहेश्वरी जी ने न केवल हिंदी के क्लासिक और समकालीन लेखकों को पाठकों तक पहुँचाने का कार्य किया है, बल्कि उन्होंने प्रकाशन को एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप दिया है। उनके प्रयासों से राजकमल ने कथा, कविता, आलोचना, दर्शन और समाजशास्त्र जैसे विविध क्षेत्रों की श्रेष्ठ कृतियों को प्रकाशित किया है। वे मानते हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को विचार और दृष्टि देने का माध्यम है। आज जब प्रकाशन उद्योग डिजिटल बदलावों से गुजर रहा है, माहेश्वरी जी ने राजकमल को इस परिवर्तन के साथ जोड़ा है। ई-पुस्तकों और ऑनलाइन मंचों के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया है।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा के प्रोफेसर नीरज कुमार जी समकालीन हिंदी आलोचना और अध्यापन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वे लंबे समय से विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रहे हैं और छात्रों को साहित्य की गहराई, आलोचना की दृष्टि और सामाजिक संदर्भों से जोड़ने का कार्य करते हैं। नीरज जी का शोध और लेखन हिंदी साहित्य के विविध आयामों को समेटता है। वे विशेष रूप से आधुनिक हिंदी आलोचना, समाज और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उनके लेख और शोध पत्र विभिन्न पत्रिकाओं और संकलनों में प्रकाशित हुए हैं, जिनमें साहित्यिक विमर्श के साथ-साथ सामाजिक सरोकार भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। शिक्षण के साथ-साथ वे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और सेमिनारों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। प्रोफेसर नीरज कुमार का व्यक्तित्व सौम्यता और गंभीरता का संगम है—वे छात्रों को न केवल साहित्यिक दृष्टि प्रदान करते हैं बल्कि सामाजिक चेतना भी जगाते हैं।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर वेद प्रकाश साहित्यिक और सांस्कृतिक विमर्श के क्षेत्र में एक सक्रिय हस्ताक्षर हैं। वे लंबे समय से अध्यापन और शोधकार्य में संलग्न हैं और छात्रों को हिंदी साहित्य की गहराई तथा आलोचना की दृष्टि से परिचित कराते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 28 जनवरी 2025 को आयोजित संगोष्ठी ‘संत काव्य : ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’ के दूसरे सत्र की अध्यक्षता की, जो उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रमाण है । प्रो. वेद प्रकाश का शोधक्षेत्र आधुनिक हिंदी कविता है, साथ ही वे संत कवियों की परंपरा को आधुनिक दृष्टिकोण से समझने और प्रस्तुत करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके लेख और शोधपत्र विभिन्न पत्रिकाओं तथा संकलनों में प्रकाशित होते रहे हैं, जिनमें साहित्यिक विमर्श के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों की गहरी पड़ताल दिखाई देती है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे बहु-सांस्कृतिक वातावरण में उनकी उपस्थिति हिंदी विभाग को एक विशिष्ट पहचान देती है। प्रो. वेद प्रकाश छात्रों को न केवल साहित्यिक दृष्टि प्रदान करते हैं बल्कि सामाजिक चेतना भी जगाते हैं।

अविनाश चंद्र एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें भारत के प्रमुख मीडिया संस्थानों—दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा और अमर उजाला—में 15 वर्षों से अधिक का कार्यानुभव प्राप्त है। उन्होंने रेडियो, टेलीविज़न, प्रिंट और डिजिटल जैसे सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काम किया है। वर्तमान में वे सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (भारत) में सीनियर फेलो और WAEN (कनाडा) में सीनियर पॉलिसी फेलो के रूप में कार्यरत हैं। पत्रकारिता के अलावा अविनाश एक प्रकाशित लेखक और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अब तक 12 पुस्तकों का अनुवाद और संपादन किया है तथा आठ नीति दृष्टिकोणों को तैयार किया है। उनका हालिया कार्य सामाजिक क्षेत्र पर केंद्रित है, जिसमें वे स्ट्रीट वेंडर्स, रिक्शा चालकों और कम लागत वाले निजी स्कूलों के अधिकारों और आजीविका के लिए सक्रिय रूप से आवाज उठा रहे हैं। वे विभिन्न परोपकारी पहलों के माध्यम से इन वंचित वर्गों के लिए नीति निर्माण और जनजागरूकता का कार्य कर रहे हैं।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट ने प्रथम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान डॉ चंदन तिवारी को देने की घोषणा की है। प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आचार्य जी के प्रिय शिष्य डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय निर्णायक मंडल ने डॉ चंदन तिवारी के शोध प्रबंध 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का भाषा चिंतन' को शोध सम्मान के लिए चयनित किया है। दिल्ली में 7 मार्च 2026 में आयोजित होने वाले एक सम्मान समारोह में डॉ तिवारी को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मूल निवासी डॉ चंदन तिवारी ने दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय से वर्ष 2022 में 'आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भाषा चिंतन' विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। वह वर्तमान में राजस्थान के सलूंबर जिले इसके राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर (गेस्ट फैकेल्टी) के रूप में कार्यरत हैं । डॉ चंदन तिवारी को प्रथम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शोध सम्मान के तहत एक पदक, प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। राजकमल प्रकाशन चयनित शोध प्रबंध को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करेगा जिसका विमोचन भी सम्मान समारोह में किया जाएगा।
मंच संचालक वरिष्ठ पत्रकार अविनाश चंद्र
– 5:15 बजे – सभी माननीय अतिथियों का मंच पर स्वागत
– 5:25 बजे – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के चित्र पर पुष्पांजलि एवं माननीय अतिथियों स्वागत :
– डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी
– श्री आशीष सूद
– पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा
– श्री देवेंद्र चंद्र श्रीवास्तव
– 5:35 बजे – ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. अपर्णा द्विवेदी द्वारा पुरस्कार एवं ट्रस्ट की जानकारी
– 5:47 बजे – शोध सम्मान विजेता डॉ. चंदन तिवारी का अभिनंदन
– माननीय अतिथियों द्वारा मेडल, प्रमाणपत्र एवं ग्रंथावली प्रदान
– 5:55 बजे – निर्णायक मंडल का सम्मान एवं डॉ. चंदन तिवारी की पुस्तक का लोकार्पण
– 6:05 बजे – डॉ. चंदन तिवारी का संक्षिप्त वक्तव्य
इसके पश्चात:
– श्री आशीष सूद (दिल्ली के शिक्षा मंत्री)
– पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा
– श्री देवेंद्र चंद्र श्रीवास्तव
– अंत में निर्णायक मंडल के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी का संबोधन
समापन – रत्नेश जी धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करेंगे एवं सभी को चाय के लिए आमंत्रित करेंगे।


